बिहार में बिजली गिरने से बहा के 23 राज्यों में 83 लोगो की मोत

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दिनांक 25 jun दिन गुरुवार को बिजली गिरने से बिहार में 83 लोगो की मौत हुई। बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 83 लोगो की मौत हुई.जबकि कई लोग झुलस गए। उत्तर प्रदेश में भी बिजली गिरने से काम से 24 लोगो की  मोतो का मामला सामने आया।बिहार के 23 जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से मानवीय क्षति हुई। सबसे ज्यादा मौतों का मामला गोपालगंज में सामने आया। वहा 13 लोगो की मौत हुई। मधुबनी और नबादा में 8-8 लोग मरे गए। भागलपुर और सीबन में 6-6 लोगो की मौत हुई। दरभंगा , बांका और पूर्वी चम्पारण में 5-5 लोगो की मौत हुई। ओरंगवाद और खगड़िया में 3-3 की मौत हुई। कैमूर,बक्सर ,सुपोल , जमुई , जहानाबाद और किसनगंज में 2-2 लोगो की मौत हुई। इनमे से कोई खेतो में हल चलाकर लोट रहा था तो कोई धन की रोपाई करके लोट रहा था तो कोई भैस चरा रहा था। इस तरह बिहार में 83 लोग मरे गए। बिहार के मुख्य मंत्री नितीश कुमार ने आकाशीय बिजली गिरने से मरने वाले लोगो को 4-4लाख रूपये मुआवजा देने का एलान किया।

बही PM मोदी ने भी ट्वीट करके कहा

“बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों के निधन का दुखद समाचार मिला। राज्य सरकारें तत्परता के साथ राहत कार्यों में जुटी हैं। इस आपदा में जिन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, उनके परिजनों के प्रति मैं अपनी संवेदना प्रकट करता हूं।”

कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी ने भी इस घटना पर दुःख जताया और ट्वीट करके कहा “बिहार में बिजली गिरने से 83 लोगों की मौत की ख़बर सुनकर स्तब्ध हूँ। भगवान उनके प्रियजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे। कॉंग्रेस कार्यकर्ताओं से मेरी अपील है कि पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद करें।”

बदलो में बिजली बनती कैसे है ?

चूकि बादल भाप से बनते है , जिस कारण इनमे नमी होती है। यह नमी बदलो में जल के बेहद बारीक कणो या बर्फीय क्रिस्टलो के रूप में होती है।, जब हवा और इन जलीय कणो के बीच फ्रिक्शन होता है तो इस फ्रिक्शन से वाटर पार्टिकल इलेक्ट्रिकल आवेशित हो जाते है। बादलों के कुछ समूह ऋणात्मक तथा कुछ धनात्मक होते है। जब(+) तथा(-) आवेशित बादल एक दूसरे के पास आते है तो वे आपस में टकरा जाते है जिसके कारण बेहद उच्च विद्युत शक्ति का निर्माण होता है। रोशनी की इस चमक को हम बिजली का चमकना कहते है। आकाश में यह चमक लगभग २-३ किमी उचाई पर उत्पन्न होती है।
प्रकाश की गति ध्वनि से अधिक होने के कारण चमक हमे पहले दिखाई देती है तथा गर्जन बाद में सुनाई देती है। हालाँकि दुनिया भर में हर सेकेण्ड में 40 बार बिजली गिरती है। पुरे दिन में 30 लाख बार बिजली गिरती है। ये सभी बिजली जमीं से नहीं टकराती। इनमे से कुछ बादलो से बादलो पर ही गिर जाती है। आकाश में (+)&(-)आवेश वाले बदल होते है , इसलिए ये आवेश एक दूसरे को अपनी और खींचते है. जब ये आवेश आपस में टकराते है तो बादलो में बिजली का निर्माण हो जाता है। लेकिन बादलो से बिजली क्यों और कैसे गिरती है। बिजली दो प्रकार की होती है

1.(+)     2.(-)  धरती के नजदीक के बादलो में(-) आवेश होता है और धरती की सतह में पहले से (-)आवेश होता है। ऐसे में बादलो में मौजूद (-) आवेश जमीन पर मौजूद (-) आवेश को अपनी हटा देते है। ये ठीक उसी तरह से होता है, जैसे दो चुम्बक के सामान सिरों को आपस में पास लाने पर होता है , ऐसा होने पर जमीन पर सभी चीज़े (मिटटी, पानी, पौधे आवेशित है|

बदलो में बिजली कड़कती क्यों है-

जब बिजली हवा से होकर गुजरती है तब हवा में गर्मी आने से हवा अत्यधिक तेजी से फैलती है और इसके लाखो अणु आपस में टकराते हैं इन अणुओं के आपस में टकराने से ही गरज की आवाज उत्पन होती है जिसको हम बिजली का कड़कना कहते हैं बास्तब में बिजली हवा को 50000 डिग्री F तक गर्म क्र सकती है जो की सूरज की सतह से 5 गुना अधिक गर्म होती है

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